➤ मोदी सरकार के कार्यकाल में हिमाचल में रोजगार सृजन दोगुना, 32.6 लाख मंडेज
➤ वीबी–जी राम जी योजना से 125 दिन की कानूनी रोजगार गारंटी
➤ हिमाचल को 90:10 फंडिंग पैटर्न से मिलेगा विशेष लाभ
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी–जी राम जी अधिनियम 2025 लागू कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह योजना केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार को विकास से जोड़ने वाली दूरदर्शी पहल है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि आज़ादी के बाद ग्रामीण रोजगार के लिए कई योजनाएं लागू हुईं। वर्ष 2005 से 2025 तक लागू मनरेगा ने 100 दिन की गारंटी दी, लेकिन औसतन 50.4 दिन का ही रोजगार मिल पाया। इसके विपरीत वीबी–जी राम जी योजना में 125 दिन की कानूनी गारंटी दी गई है, जिसे गांवों के विकास कार्यों से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत ग्राम सभा स्तर पर विकास प्लान तैयार होगा, जो ब्लॉक, जिला और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा। उसी विकास योजना के अनुसार रोजगार सृजन होगा, जिससे समग्र ग्रामीण विकास सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह योजना पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। इसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा, समयबद्ध भुगतान और देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान शामिल है, जिससे जवाबदेही तय होगी।
फंडिंग पैटर्न पर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात तय किया गया है, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 है। यह व्यवस्था प्रदेश के लिए बेहद लाभकारी है।
आंकड़े प्रस्तुत करते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान 2006 से 2014 तक मनरेगा पर ₹2.13 लाख करोड़ खर्च हुए, जबकि एनडीए सरकार ने 2014 से 2025 के बीच ₹8.53 लाख करोड़ से अधिक खर्च किए। रोजगार सृजन यूपीए काल में 1660 मिलियन मंडेज, जबकि मोदी सरकार के दौरान 3210 मिलियन मंडेज रहा।
हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में 16.52 लाख मंडेज, जबकि मोदी सरकार में 32.6 लाख मंडेज सृजित हुए, यानी दोगुना रोजगार। वीबी–जी राम जी योजना के तहत करीब ₹1.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि योजना चार प्रमुख क्षेत्रों—ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—पर केंद्रित है। प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि निगरानी और क्रियान्वयन मजबूत हो सके।
डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस केवल नाम बदलने का मुद्दा उठाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि असली मुद्दा परिणाम और विकास है। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है।



